सीधे आपके अंतःकरण से

Posted: March 20, 2014 in Uncategorized

स्वामी ब्रहमदेव कहते हैं कि हर चीज के पीछे पहले एक विचार होता है और तब वह कल्पना का रूप लेता है। जब हम कल्पना करते है, सभी शक्तियां हमारी कल्पनाशक्ति को आकृति देने का कार्य करती हैं। इसलिए हमें सावधान रहना चाहिए क्योंकि अधिकतर समय हम कल्पना में जीते हैं। रूको, जांच करो कि तुम क्या कर रहे हो और आप पाओगे कि जो आप कल्पना कर रहे हो, 90 प्रतिशत नकारात्मक कल्पना करते हैं और जब हम नकारात्मक चीजें सोचते हैं तो हम नकारात्मक चीजें ही करते हैं। हालांकि, अनजाने में ही हम नकरात्मक कल्पना के साथ चीजें करते है। यहां कल्पना का मतलब डर है।

डर को कौन पैदा करता है। उत्तर है: नकारात्मक कल्पना। हम योगा, ध्यान, पौष्टिक आहार,  अच्छी जीवनशैली अपनाकर और अच्छे लोगों के साथ रहने की कोशिश कर सकते हैं। यह हम नियमित रूप से ध्यान या योगा करते हैं, हम नकारात्मकता से निजात पा सकते हैं। जब हम 100 प्रतिशत स्पष्ट हो जाता है कि यह खुशी, सौहार्द, सुखद और हर चीज स्वतः ही होती जाती है। कोई डर नहीं होती है, जीवन संुदर है। स्पष्टता ही जीवन का आध्यात्मक रूप है। हम हर क्षण जीते हैं, हम आगे बढ़ते हैं और हमें स्पष्ट होता है हम क्या कर रहे हैं।

प्रश्न है: स्पष्टता कहां से आ सकती है? स्पष्टता के कई प्रकार होते हैं। यदि हम यहां है तो हम स्पष्टताओं के साथ जीते हैं, हम यहां है क्योंकि हम कुछ स्पष्ट हैं कि हम यहां क्यों है, यदि हम कुछ करते हैं, हमारे स्पष्ट हैं कि हम यह क्यों करना चाहते हैं। सामान्यतया, हमारा मस्तिष्क हर चीज की गणना करते है। और इस गणना के आधार पर स्पष्टता आती है लेकिन मानसिक स्पष्टता हमेशा बेहतर नहीं होती है, क्योंकि यह गणनाओं पर आधारित है और गणनाएं गलत होने के रूप में जानी जाती है, मानसिक स्पष्टता जल्दी से आ सकती है।

हम उनके साथ काम करना शुरू करते हैं लेकिन जो हम चाहते है या जिसकी आवश्यकता होती है, परिणाम उससे विपरीत हो सकता है। कभी-कभी हम भावनात्मक स्पष्टता के साथ प्रक्रियाएं करते हैं। हमारे अधिकतर संबंध भावनात्मक स्पष्टता पर आधारित होते हैं और वे बहुत तेजी से बदलते हैं। आज, हमारे पास ये भावना है, एक घंटे के बाद भावनात्मक स्पष्टता के साथ भावना बदल जाती है। हम बेहतर संभावनाओं को आनंद लेने में समर्थ नहीं होते हैं। स्पष्टताएं हमारी अंहकार से, हमारे आवेगों से, हमारी सर्वोच्च्ता, हमारी शारीरिक संरचना से आ सकती हैं। अतः हमें किस प्रकार की स्पष्टता की आवश्यकता होती है? कौन-सी स्पष्टता हमें बेहतर और अधिकतम संभावनाएं दे सकती है।

यह सतर्कता की स्पष्टता है, यह अत्यधिक समझ से आती है: यह हमारी मानसिकता है और सीधे हमारे अंतःकरण से आती है।

अपने अंतःकरण की सुनकर हम अपनी क्षमता को बढ़ा सकते हैं जब मानसिक स्पष्टता आती है, हम अपने मस्तिष्क की सुनते हैं और हम उन्हें ही अपनाते हैं। जब भावनात्मक स्पष्टता आती है, हम अपनी भावनाओं की सुनते हैं और उनके अनुसार चलते हैं। जब शारीरिक स्पष्टता आती है, हम अपनी शारीरिक स्पष्टता के सुनते हैं। अंतःकरण्र भी बोलता है, अपने अंतःकरण की सुनकर में अपनी क्षमता में वृद्धि कर सकते हैं और उसके बाद जो कुछ भी आत्मा से आता है वह अधिक स्पष्ट साबित होगा। यह सभी के लिए बेहतर है, यह अधिकतम स्पष्ट है। यह चेतना है, मानसिक स्पष्टता है।

और यदि हम इसके साथ चलते हैं, जीवन हमें बेहतर देता है और सभी संभावनाओं में सबसे अधिक सामंजस्य  होता है। यह हमारे जीवन को समझने का कार्य है, यह अपने को जानने और समझने के लिए हमारे जीवन की संपूर्ण तकनीक है, जीवन प्रणाली है। यह एक निरंतर और अंतहीन पूर्णकालिक कार्य है। अधिक चेतना प्राप्त करने के लिए हम अधिकतर अपने बाहर रहते हैं, हम अधिकतर समय अपने अंदर रहने की कोशिश करनी चाहिए।

Article by:सुधामहि रेगुनाथन

Source: http://www.speakingtree.in/

 

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